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एक शख्स पीएम मोदी को चुनौती देते हुए खुद को बता रहा है भारत का अगला प्रधानमंत्री

एक शख्स पीएम मोदी को चुनौती देते हुए खुद को बता रहा है भारत का अगला प्रधानमंत्री August 2, 2017

एक तरफ पीएम मोदी को लेकर विरोधी भी कह रहे हैं कि वो अगले लोकसभा चुनाव में भी आसानी से जीत जाएंगे और फिर से भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे. एक समय पर पीएम मोदी के विरोधी रहे नीतीश कुमार भी अब पीएम मोदी की ताकत को समझ गए हैं और उन्होंने भी पहले ही भविष्यवाणी कर दी है कि नरेंद्र मोदी ही 2019 में भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे, लेकिन नोएडा का एक नवयुवक ऐसा भी है जिसको ऐसा नहीं लगता. इस युवक ने दावा किया है कि 2019 के चुनावों में वो पीएम मोदी के खिलाफ एक तगड़ा दावेदार होगा.

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पीएम मोदी के सामने खुद को एक तगड़ा दावेदार बताने वाले इस युवक का नाम विनोद पंवार है और इसकी उम्र 36 साल है. हालांकि आप लोगों को ये बात एक मज़ाक लग रही होगी लेकिन विनोद कुमार तो इस मामले में पूरी तरह से गंभीर हैं. विनोद पंवार का कहना है कि किसी ज्योतिषी ने यह भविष्यवाणी की है कि वह 2019 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के सामने एक तगड़े दावेदार होंगे. इसके बाद विनोद ने पीएम मोदी को चैलेंज करते हुए कुछ पोस्टर भी बनाए हैं.

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विनोद नोएडा के सेक्टर 50 में रहता है और वहां एक कोचिंग सेंटर चलाता है. विनोद ने भारत के एक नामचीन अखबार को बताया कि, ‘देश बहुत गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जा रही. भारत की सीमाओं पर तनाव बना हुआ है. ऐसे बहुत से मुद्दे हैं जिनको सुलझाने की जरुरत है. मैं देश में आर्थिक विकास और समृद्धि लाने के लिए देश का पीएम बनना चाहता हूँ.’

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ये पहली बार नहीं है जब पवार राजनीति में अपना भाग्य आजमाने की कोशिश कर रहे हैं इससे पहले भी वो ये काम कर चुके हैं, उन्होंने जनवरी 2017 में नोएडा विधानसभा से विधायक के चुनाव के लिए नामांकन भरा था. नामांकन भरने के दौरान उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपना दोस्त बताया था. उन्होंने अपने प्रस्तावकों के तौर पर महात्मा गांधी समेत कई महान स्वतंत्रता सेनानियों का नाम दिया था.

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हालांकि विनोद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाए थे. चुनाव आयोग ने यह कहकर उनका नामांकन खारिज कर दिया था कि, उन्होंने पर्याप्त जानकारी नहीं दी है. आपको बता दें कि अपने प्रस्तावकों के रूप में विनोद ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर, एपीजे अब्दुल कलाम, स्वामी विवेकानंद गौतम बुद्ध, सुभाष चंद्र बोस और कई महान लोगों का नाम दिया था. नियम ये है कि किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार को अपने शपथपत्र पर कम से कम 10 प्रस्तावकों का हस्ताक्षर देना होता है. प्रस्तावक को उसी विधानसभा का वोटर होना चाहिए, लेकिन विनोद ने उन लोगों के नाम प्रस्तावकों के रूप में दिए हैं जो अब इस दुनिया में ही नहीं हैं.

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विनोद इसके बावजूद भी प्रस्तावकों के रूप में ऐसे नाम देने के अपने फैसले को सही बता रहे हैं. विनोद सवाल करते हैं कि, ‘जब मेरे पास महान स्वतंत्रता सेनानियों और दूसरे विद्वानों का नाम देने के लिए है तो मैं क्यों स्थानीय लोगों के नाम प्रस्तावक के तौर पर दूँ.’ .