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नवाज़ शरीफ पनामा पेपर लीक के मामले में फसने के बाद अमिताभ बच्चन बने घूम रहे हैं ?

काफ़ी समय से चले आ रहे पनामा पेपर लीक मामले को लेकर आज शुक्रवार 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है

नवाज़ शरीफ पनामा पेपर लीक के मामले में फसने के बाद अमिताभ बच्चन बने घूम रहे हैं ? July 30, 2017

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अपने पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा. जी हाँ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नवाज शरीफ को दोषी करार दिया है. आपको बता दें कि इस केस की सुनवाई जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच में हुई है, जिसमें नवाज शरीफ और उनके बच्चों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश आया है.

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पाकिस्तान में नवाज शरीफ 3 बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं इस दौरान उनपर और उनके परिवार पर करप्शन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे संगीन आरोप हैं. जिसके लिए 5 जजों की बेंच में से एक जज जस्टिस एजाज अफजल खान ने अपने फैसले में कहा है कि, ” नवाज शरीफ को पार्लियामेंट की मेंबरशिप से डिसक्वालिफाई किया जाता है. कोर्ट ने नवाज शरीफ की बेटी मरियम और दोनों बेटों हसन-हुसैन पर भी करप्शन का केस दर्ज करने का आदेश दिया है.

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आपको बता दें कि पाकिस्तान में 2018 में आम चुनाव होने वाले हैं. इसके साथ ही जैसे ही फैसला आया था, वैसे ही नवाज शरीफ के विपक्षी इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ ने कोर्ट के बाहर ही जश्न मनाना शुरू कर दिया था.  नवाज शरीफ के इस्तीफे के बाद इमरान खान ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए एक ट्वीट किया है जिसमें लिखा है, गॉडफादर की सत्ता का अंत हुआ…सच और इंसाफ की जीत हुई।”

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इस मामले में नवाज शरीफ की बेटी और दामाद भी दोषी करार किये गए हैं. आपको बता दें कि जैसे ही नवाज शरीफ के खिलाफ फैसला आया वैसे ही सोशल मीडिया पर लोगों ने बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को ट्रोल करना शुरू कर दिया.

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लोगों का कहना है कि पनामा केस में पाकिस्तान अपने प्रधानमन्त्री तक को दोषी करार देता हैं और वहीँ हमारे देश में उन्ही पनामा दोषियों को ब्रांड एंबैसडर बना दिया जाता है. कुछ यूजर्स ने तो मज़ाक उड़ाते हुए ये कहा है कि नवाज़ शरीफ ने तो अमिताभ बच्चन का रूप धारण कर लिया है ताकि भारत सरकार उन्हें पाकिस्तान से निकाल कर अपने देश में स्वच्छ भारत अभियान का ब्रांड एंबैसडर बना ले.

जैसे कि मौका भी खूब ख़ास है तो लोग इस ख़ास मौके का फायेदा भी उठा रहे हैं, जी हाँ कुछ यूजर्स तो ऐसे भी हैं जो अमिताभ बच्चन के साथ-साथ भारत सरकार का भी मज़ाक उड़ा रहे हैं.

आपको बता दें कि पनामा पेपर्स में अमिताभ बच्चन और उनकी बहू ऐश्वर्या राय बच्चन का भी नाम सामने आया था, लेकिन अमिताभ बच्चन ने इन आरोपों को साफ़-साफ़ झूठा साबित कर दिया था. आरोप था कि सामने आए दस्‍तावेजों में टैक्‍स हैवन देशों में बनाई गई कंपनियों में एश्‍वर्या राय और अमिताभ बच्‍चन डायरेक्‍टर के तौर पर जुड़े थे. लेकिन वहीँ अमिताभ बच्चन का दावा है कि वह कभी इस प्रकार की कंपनियों में डायरेक्‍टर नहीं रहे है, उनका नाम बेफालतू में इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

हमेशा से ही ऐसा होता आया है पाकिस्तान के इतिहास में जब कोई प्रधानमंत्री…

आपको बता दें कि पाकिस्तान के इतिहास में अभी तक कोई भी प्रधानमंत्री अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया. कभी किसी प्रधानमंत्री को ज्यूडिशियरी ने बेदखल कर दिया तो किसी को मिलिट्री ने. यहाँ तक कि पाकिस्तान में तो ऐसे भी बुरे हालात हैं जहाँ अपनी ही पार्टी के लोग अपने ही प्रधानमंत्री को बाहर का रास्ता दिखा देते हैं.

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यह मामला पाकिस्तान के इतिहास में दूसरा मामला है जब सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार किसी मौजूदा प्रधानमंत्री को डिस्क्वालिफाई किया हो. इससे पहले 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने यूसुफ रजा गिलानी को डिस्क्वालिफाई किया था.

क्या है पनामा पेपर्स लीक?

आपको बता दें कि पिछले साल ब्रिटेन से कुछ टैक्स डॉक्युमेंट्स लीक हुए थे जिसमें दुनियाभर के सैकड़ों सेलिब्रिटीज और 140 नेताओं ने टैक्स हैवन कंट्रीज में अपना पैसा इन्वेस्ट किया था, ताकि ये लोग अपना टैक्स बचा सकें.

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यह पेपर्स खासतौर पर पनामा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड और बहामास में हुए इन्वेस्टमेंट के बारे में बताते थे. पनामा में ऐसी 3.50 लाख से भी ज्यादा सीक्रेट इंटरनेशनल बिजनेस कंपनियां हैं, जहाँ पर टैक्स रूल्स काफी आसान हैं और साथ ही यहाँ क्लाइंट की आइडेंडिटी का खुलासा नहीं किया जाता.

कैसे हुआ नवाज शरीफ का खुलासा- 

नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज और बेटे हुसैन हसन ने टैक्स हैवन माने जाने वाले ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में कम से कम चार कंपनियां शुरू कीं थी और इन्ही कंपनियों से इन्होंने लंदन में छह बड़ी प्रॉपर्टीज खरीदी. इतना ही नहीं नवाज शरीफ की फैमिली ने इन प्रॉपर्टीज को ही गिरवी रखकर डॉएशे बैंक से करीब 70 करोड़ रुपए का लोन लिया था. इसके अलावा, दूसरे दो अपार्टमेंट खरीदने में बैंक ऑफ स्कॉटलैंड ने उनकी मदद भी की थी.

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शरीफ की विदेश में इन प्रॉपर्टीज की बात उस वक्त सामने आई जब लीक हुए पनामा पेपर्स में दिखाया गया कि उनका मैनेजमेंट शरीफ के परिवार के मालिकाना हक वाली विदेशी कंपनियां करती थीं।

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आपको बता दें कि पनामा मामले की जांच कर रही ज्वाइंट इन्वेस्टीगेशन टीम ने अपनी फाइनल रिपोर्ट 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एजाज अफजल की अगुआई वाली बेंच में 5 जजों ने अपना फैसला 21 जुलाई को सुरक्षित रख लिया था.

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इस रिपोर्ट में बताया गया है कि नवाज़ शरीफ़ नें 1990 में प्रधानमंत्री के तौर पर लंदन में प्रॉपर्टीज खरीदी थीं. हालांकि नवाज़ शरीफ़ नें इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए ज्वाइंट इन्वेस्टीगेशन टीम की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है.