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नीतीश कुमार के विश्वासमत के दौरान मुस्लिम विधायकों ने मांग लिया जुमे की नमाज़ के लिए वक़्त जिसके बाद नीतीश ने उठाया ऐसा कदम कि..

राजनीति भी कई बार कुम्भ के मेले की तरह बन जाती है जिसमें नेता मिलते भी रहते हैं और बिछड़ते भी रहते हैं. 

नीतीश कुमार के विश्वासमत के दौरान मुस्लिम विधायकों ने मांग लिया जुमे की नमाज़ के लिए वक़्त जिसके बाद नीतीश ने उठाया ऐसा कदम कि.. July 30, 2017

राजनीति के कुम्भ में ऐसे ही दो नेताओं का लगभग 20 महीने पहले मिलन हुआ था,  वो मिलन जो अब टूट चुका  है. हम यहाँ बात कर रहे हैं नीतीश कुमार और लालू यादव के महागठबंधन की. आपको बता दें कि यह गठबंधन हुआ तो इसलिए था कि दोनों लोग मिलकर नरेन्द्र मोदी से एक दूसरे की रक्षा कर सकें,  लेकिन इन दोनों का भरत मिलाप अपनी ही रक्षा नहीं कर पाया. जब ये दोनों मिले थे तब इनके सुर एक जैसे थे. उस वक्त ये दोनों नेता मिले सुर मेरा तुम्हारा वाले तर्ज़ पीएम मोदी को कोस रहे थे और पीएम मोदी के खिलाफ लड़ने के लिए नए फार्मूला ढूंढ रहे थे. लेकिन आज समय बदल चुका है इसलिए कहते है कि राजनीति में न तो कोई किसी का पक्का दोस्त होता है न कोई पक्का दुश्मन .

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नीतीश कुमार के इस तरह अचानक से आये इस्तीफ़े को लालू यादव और उनका परिवार मानो हजम ही नही कर पा रहे हैं. तभी कोई तर्क तो कभी कोई आरोप लगाकर वो नीतीश कुमार के इस इस्तीफे तो बेबुनियाद बताने में जुटे हुए हैं. खैर अब तो लग रहा है यादव परिवार के इस नाटक का शायद ही कोई असर हो, क्योंकि नीतीश कुमार ने इस्तीफ़ा भी दे ही दिया और विश्वासमत भी साबित कर लिया.

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विश्वासमत परिक्षण के दौरान नीतीश कुमार ने दिया छोटा भाषण क्योंकि… 

हालाँकि विश्वासमत के दौरान नीतीश कुमार ने काफी छोटा भाषण दिया. बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार 28 जुलाई को विश्वासमत परीक्षण के दौरान मात्र 12 मिनट ही विधानसभा में बोले. हालाँकि इस छोटे भाषण का कारण ये बिलकुल भी नही था कि उन्हें स्पीकर की ओर से बोलने का समय नही दिया गया था बल्कि इसका कारण…

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जुमे की नमाज़ के लिए मुस्लिम विधायकों ने माँगा था समय

दरअसल हुआ यूँ कि नीतीश कुमार के भाषण से ठीक पहले राज्य के कुछ मुस्लिम विधायकों ने नीतीश कुमार से जुमे की नमाज़ के लिए वक़्त माँगा था, जिसका सम्मान करते हुए नीतीश कुमार ने विपक्ष के आरोपों के बावजूद अपना भाषण मात्र 12 मिनट का रखा और उतने ही वक़्त में उन्होंने कोशिश की कि सभी के सवाल का जवाब वो दे दें.

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45 मिनट में देना था जवाब लेकिन मुस्लिम विधायकों ने माँगा था समय इसलिए 12 मिनट में ही सिमटा लिया अपना भाषण 

एक वेबसाइट पर छपी एक खबर के मुताबिक पहले ये तय हुआ था कि नीतीश कुमार विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के 40 मिनट के भाषण का जवाब 45 मिनट की स्पीच में देंगें, लेकिन वो इस दौरान लगातार घड़ी की सुइयों पर नज़र बनाये हुए थे. ऐसा वो इसलिए कर रहे थे क्योंकि मुस्लिम आरजेडी-जेडीयू सरकार में मंत्री अब्दुल गफूर और अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने उनसे पहले से ही जुमे की नमाज के लिए वक़्त की मांग की थी. ऐसे में विधानसभा के सदस्यों की इस मांग पर सीएम नीतीश कुमार ने बिना एक पल भी गवाए अपना मत दे दिया था.

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नीतीश ने छोटे से भाषण के बाद वादा किया कि वो जल्द ही विस्तार से सारे जवाब देंगें 

विधानसभा स्पीकर विजय चौधरी ने इस बात की घोषणा करते हुए कहा कि, “विश्वासमत पर बहस और वोट दोनों ही 12 बजकर 45 मिनट पर खत्म कर दिया जायेगा. ऐसे में सीएम नीतीश कुमार विश्वास मत के दौरान चल रही बहस पर बोलने वाले आखिरी इंसान बचे थे, इसलिए उन्होंने अपना भाषण कम शब्दों में और छोटा ही भाषण दिया ताकि मुस्लिम विधायक वक्त पर नमाज पढ़ने के लिए जा सकें.  हालांकि अपने इस बेहद छोटे भाषण के बाद नीतीश कुमार ने ये वादा किया कि वो जल्द ही विपक्ष के आरोपों का विस्तार से जवाब देंगे.

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“साम्प्रदायिकता के नाम पर करप्शन बर्दाश्त नहीं होगा”

भाषण का वक़्त काम था लेकिन इस समय का पूरा-पूरा सदुपयोग करते हुए नीतीश कुमार ने विपक्ष पर ज़ोरदार हमला किया. अपने 12 मिनट के इस छोटे से भाषण में उन्होंने कहा कि, “अब साम्प्रदायिकता की आड़ में करप्शन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.”

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“जनता की समस्या को देखते हुए लिया है ये फैसला”

लालू यादव और उनके परिवार वालों के घोटालों पर बोलते हुए नीतीश ने आगे कहा कि सत्ता लोगों की सेवा के लिए होती है न कि ख़ुद  मेवा उड़ाने के लिए। नीतीश कुमार ने कहा, “हमने कई समस्याओं का मिलकर सामना किया है,  इसके बावजूद गठबंधन धर्म का पालन करने का हमने हर संभव प्रयास किया है, लेकिन अब जब समस्या बढ़ने लगी और जब स्थिति हद से ज्यादा खराब हो गई और इसके चलते जब जनता को परेशानी होने लगी तो हमारे पास इसके अलावे और कोई रास्ता नहीं बचा था.”

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अपने इस भाषण में नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव की ओर रुख करते हुए कहा कि, “उन्हें जनता ने एक परिवार की सेवा के लिए बहुमत नहीं दिया था.” नीतीश कुमार ने अपने आक्रोशित अंदाज में अपने पूर्व सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा, “आपको जनता ने वोट काम करने के लिए दिया है. ऐसे में हमारी प्रतिबद्धता है कि हम हर हाल में जनता की सेवा करें.  बिहार के विकास के प्रति है, किसी एक परिवार की सेवा करने के लिए नहीं है.”