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विकास की पोल खोल देने वाली ये रिपोर्ट पढने के बाद आपके आँखों में आंसू आ जायेंगे!

विकास की पोल खोल देने वाली ये रिपोर्ट पढने के बाद आपके आँखों में आंसू आ जायेंगे! August 2, 2017

देश को डिजीटल बनाने की बात होती है .देश में विकास की बात होती है. महिलाओं के सम्मान की बात होती है. बेटियों के बचाने की बात होती है. भारत को स्वच्छ बनाने की बात होती है. लेकिन तमाम तरह की ऐसी खबर आती है जो देश को शर्मसार करती है.जब मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते इस देश के कुछ लोग अपनी जान गवां देते है और जान गवां देने के बाद भी उन्हें सरकार से एक एम्बुलेंस न मिल पाए जिससे कि उनके  मृत शरीर को उनके घर तक पहुंचा दिया जाए तो  इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है? लेकिन आज जो हम आपको बताने जा रहे है उसे सुनकर आपको गुस्सा आये या न आये लेकिन आपके आँखों में आंसू जरूर आ जायेंग!.

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दरअसल हम बात कर रहे है एक ऐसी महिला कि जिसने सरकार की नाकामी का एक और सबूत पेश किया है जिसकी बजह से एक बार फिर देश में महिलाओं को लेकर किए  जा रहे सुविधाओं के दावे की पोल खोल कर रख दी है. बेहद शर्मनाक यह घटना मध्यप्रदेश के कटनी जिले की  है जहां एक गर्भवती महिला को एम्बुलेंस न मिलने की वजह से उसके साथ जो हादसा हुआ है वो कितना भयावह है इसे आप आगे देखेंगे. दरअसल इस महिला का नाम है बीना  बाई है और ये गर्भवती थी. प्रसव पीड़ा होने पर जब महिला का पति एम्बुलेंस को फ़ोन किया.

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महिला के पति के द्वारा बार बार फ़ोन किये जाने के बाद भी एम्बुलेंस नही आई जिसके बाद महिला अपने पति के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरही के लिए निकल पड़ी जिसकी दुरी गाँव से लगभग  20 किमी है. लेकिन महिला के 15 किमी दूर जाने के बाद महिला की सडक पर ही डिलीवरी हो गयी है और बच्ची के सडक पर गिर जाने से मौके पर ही उसकी मौत हो गयी.यह कहने और सुनने में आसान लगता है लेकिन फोटो में दिखाई गयी महिला से यह साफ़ अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिला कितनी सहमी हुई है.

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि यह घटना मध्य प्रदेश की है जहां के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान है. मुख्यमंत्री महिलाओं का इतना सम्मान करते है कि उन्हें बच्चे मामा कहते है. अब सोचने वाली बात है कि महिलाओं का इतना सम्मान करने वाले मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए अभी तक सभी अस्पतालों में एम्बुलेंस  मौजूद नही करवा पायें है. इस बात पर मुख्यमंत्री अब चाहे जो एक्शन ले लेकिन उस बेकसूर महिला का कुछ नही हो सकता है जिसने  सरकार की लापरवाही की वजह से अपने बच्चे को खो दिया.

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आप उस महिला से पूछिए जो महिला गर्भवती होने के बाद 20 किमी बिना एम्बुलेंस से जाने का फैसला करती है और 15 किमी तक जाती भी है इसी दौरान महिला बच्ची को जन्म देती है पैदा होते ही बच्ची  की सड़क अपर गिरने से तुरंत मौत हो जाने के बाद उस माँ पर क्या बीती होगी जो नेताओं को यह कहते हुए सुनकर वोट दिया था कि गर्भवती महिलाओं के लिए तमाम काम करने के वादे किये थे . इस घटना के बाद न कि सम्बंधित अधिकारियों बल्कि सभी नेताओं को सिर शर्म से  झुक जाना चाहिए. जो भी इसके लिए जिम्मेदार है. इस मामले से  संबधित अधिकारी अशोक अवधिया से पूछे जाने पर उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केद्र बरही में एम्बुलेंस नही है. और 108 जननी एक्सप्रेस के नाम से चलने वाली एम्बुलेंस उनके अधिकार में नही है.

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हम आपके सामने कुछ आकड़े पेश करने जा रहे है जिससे आप देश में गर्भवती महिलाओं के साथ होने वाली इस तरह कि घटनाओं के बारे में अच्छे से अंदाजा लगा सकते है. नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के मुताबिक मध्यप्रदेश में 2015 में गर्भवती महिलाओं की 113 महिलाओं की जान चली गयी.गर्भवती महिलाओं की सबसे ज्यादा जान महाराष्ट्र में जाती है. साल 2015 में महाराष्ट्र में 633 जान चलीं गयी थी.जननी सुरक्षा योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी स्कीम्स इन आकड़ों को कम कर पाने में नाकाम हैं क्योंकि 2014 में भी मध्यप्रदेश में 109 प्रेगनेंट महिलाओं की जानें गई थीं ये योजनाएं गर्भवती महिलाओं के लिए बनाई गयीं थी.