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सेना ने खोल दी कांग्रेस की पोल, 2016 से पहले की सर्जिकल स्ट्राइक का रिकॉर्ड नहीं

क्या मोदी सरकार से पहले कभी सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी। आरटीआई में पूछे इस सवाल के जवाब में DGMO ने कहा कि पहले के किसी भी सर्जिकल हमले का रिकॉर्ड नहीं है।

सेना ने खोल दी कांग्रेस की पोल, 2016 से पहले की सर्जिकल स्ट्राइक का रिकॉर्ड नहीं August 27, 2017Leave a comment

 

New Delhi, Aug 27: पिछले साल भारतीय सेना ने जब आतंकियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी पूरे देश में जोश की लहर दौड़ गई थी। लेकिन भारतीय सेना की इस कामयाबी और उपलब्धि से कांग्रेस दुखी हो गई थी। कांग्रेस समेत विपक्ष के कई नेता सेना के शौर्य से दुखी थे। उनके दुख का कारण ये था कि इसका श्रेय बीजेपी और पीएम मोदी को मिलेगा। मोदी से लगातार मात खा रहे विपक्ष के लिए ये एक और मात होती। तो इसका तोड़ निकालने के लिए कांग्रेस समेत विपक्ष ने सर्जिकल हमले के सबूत मांगने शुरू कर दिए। कांग्रेस ने तो यहां तक कह दिया कि सर्जिकल हमला कोई नई बात नहीं है। यूपीए सरकार के दौरान भी तीन बार इस तरह का एक्शन लिया गया था।

 

कांग्रेस के इस दावे की पोल अब खुल गई है। दरअसल सेना ने कब कब सर्जिकल स्ट्राइक की है इसको लेकर एक आरटीआई दाखिल की गई थी। इस आरटीआई के जवाब में DGMO ने जो कहा है वो कांग्रेस के लिए झटके वाली है। पीटीआई के मुताबिक डीजीएमओ ने कहा है कि 29 सितंबर 2016 को सर्जिकल हमला किया गया था। अगर उस से पहले कोई सर्जिकल हमला किया गया है तो उसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। पहले के सर्जिकल हमले का रिकॉर्ड नहीं है इसका मतलब साफ है कि पहले कभी इस तरह का एक्शन नहीं लिया गया होगा। अब कांग्रेस क्या अपने दावों को वापस लेगी।

 

इसके अलावा आरटीआई में सर्जिकल हमले की परिभाषा भी पूछी गई थी। ये आरटीआई रक्षा मंत्रालय में लगाई गई थी। इसके जवाब में DGMO ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक लेकर ओपन सोर्स में उपलब्ध सूचना के मुताबिक, ये ऐसा अभियान है जिसके लिए खुफिया जानकारी के आधार पर अधिकतम प्रभाव और भारतीय सेना को कम से कम या न के बराबर क्षति हो। उसके लिए उचित लक्ष्य साधा जाता है। उन्होंने बताया कि इस के जरिए पहले से तय लक्ष्य पर सतर्कता के साथ निशाना साधा जाता है। काम खत्म होने के बाद तेजी से वापस लौटना होता है। इस तरह के हमलों में कम से कम क्षति या फिर कोई क्षति न हो इसका ध्यान रखा जाता है।

 

आपको बता दें कि आरटीआई में क्या पूछा गया था। रक्षा मंत्रालय को भेजी गई आरटीआई में पूछा गया था कि क्या सेना ने 2004 और 2014 के बीच सर्जिकल हमला किया था। रक्षा मंत्रालय ने इस याचिका को सेना के इंटेग्रेटेड हेडक्वॉर्टर्स को भेज दिया था। बता दें कि उड़ी में सेना के कैंप पर आतंकी हमले के बाद भारत ने पिछले साल सितंबर के महीने में पीओके में आतंकियों के ठिकानों पर सर्जिकल हमला किया था। इस हमले में 50 के करीब आतंकियों के मारे जाने की खबर थी। इस हमले को लेकर सियासत भी जमकर हुई थी। कांग्रेस ने दावा किया था कि यूपीए सरकार के दौरान इस तरह की कार्रवाई की जा चुकी है। लेकिन अब ये साफ हो गया है कि मोदी सरकार से पहले सर्जिकल स्ट्राइक की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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