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पढ़ें एक हिन्दू योद्धा की गाथा जिसने अटक से कटक तक मुगलों को उखाड़ फेंका था..

पढ़ें एक हिन्दू योद्धा की गाथा जिसने अटक से कटक तक मुगलों को उखाड़ फेंका था..
आज के भारत में आप हिन्दू शासन काल के बारे में सही और सटीक जानकारी आसानी से प्राप्त नहीं कर सकते है. ह

पढ़ें एक हिन्दू योद्धा की गाथा जिसने अटक से कटक तक मुगलों को उखाड़ फेंका था.. January 15, 2018Leave a comment

पढ़ें एक हिन्दू योद्धा की गाथा जिसने अटक से कटक तक मुगलों को उखाड़ फेंका था..
आज के भारत में आप हिन्दू शासन काल के बारे में सही और सटीक जानकारी आसानी से प्राप्त नहीं कर सकते है. हमारे इतिहास को या तो जला दिया गया है या फिर बदल दिया गया है. कहने को सिर्फ कुछ ही किताबे आपको मिल पाएंगी जिससे आप हमारे भारतवर्ष को पूरी तरह से जान पाएंगे.

इसके अलावा इतिहास की किताबो में आपको जानबूझकर मुस्लिम शासन या अंग्रेजो के शासन काल में पढाया जाता रहा है ताकि आप भी वैसे ही खुद को बदल ले. पर यकीन करिए अगर एक बार आप हिन्दू शासन काल के बारे में सही जानकारी पा लेते है तो ये सब आपको तुच्छ लगेगा.

आज हम आपको एक ऐसे ही हिन्दू वीर के बारे में बताने जा रहे है जिसने अफ़ग़ानिस्तान के अटक से लेकर कटक तक यहाँ तक की डेल्ही तक के मुस्लिम शासन को उखड फेका था. हम बात कर रहे है वीर योधा बाजीराव पेशवा १ की जिन्होंने. दिल्ली पर भगवा लहरा दिया था.

बता दें कि दिल्ली का गौरी शंकर मंदिर आज भी उस वीर हिदू गाथा का गवाह है. दिल्ली पर भगवा लहराने के बाद ही जब वीर हिन्दू नायक ने 800 पुराने गौरी शंकर मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था. ये बात सन 1719 के आसपास की है जब पेशवा बालाजी विश्वनाथ अपनी सेना लेकर दिल्ली आये थे.

इसके बाद अपने कुशल सेनापतियों की सहायता से इन्होने यहाँ के मुग़ल शासन को उखड फेका था. इसके बाद बाजीराव पेशवा की कई अन्य राजाओं के साथ कुछ संधियाँ भी हुई थीं. इसके बाद बाजीराव ने मालवा, गुजरात और चम्बल का क्षेत्र भी अपने कब्जे में ले लिया था.

इतिहास के कई जानकारों का कहना है की बाजीराव का अधिकतर समय घोड़े की पीठ पर और युद्ध के मैदान पर ही बिता था. इसके अलावा इन्ही के साथ मिलकर रघूजी भोंसले ने उड़ीसा जीत लिया था और बिहार व बंगाल में चौथ वसूल की थी. इसके बाद एक एक करके साबाजी सिंधिया ने अटक तक विजय पा ली थी और मुस्लिम शासन को उखड फेका था.

इसी के बाद असली शासन मराठाओ के हाथ में आ गया था. दिल्ली में मुग़ल तो बस नाममात्र के रह गए थे.. मगर अफ़सोस भारतीय इतिहास के बलात्कारी वामपंथियो ने बाजीराव के जीवन में मस्तानी को जिस तरह जोड़ा उसी तरह भारतीय इतिहास में मुग़लों को पता नहीं क्या से क्या दिखा दिया.. और हालात ये हैं कि जो लोग वेद पुरानों को झूठ बताते हैं वे चंद इतिहास की किताब पढकर अपने धर्म के बारे में ही अनाप शनाप कहते हैं .. !!

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