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Big Breaking : 3 राज्यों में मोदी-शाह की चाणक्य नीति के आगे कांग्रेस-लेफ्ट के गढ़ ढह गये…

3 राज्यों में मोदी-शाह की चाणक्य नीति के आगे कांग्रेस-लेफ्ट के गढ़ ढह गये... जी हाँ, जिस नॉर्थ ईस्ट के 7 राज्यों में मोदी लहर के बावजूद लोकसभा 2014 में मात्र एक सीट जीतने वाली बीजेपी ने कांग्रेस और लेफ्ट के इन 7 स्टेट्स को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. अगर इसे मोदी-शाह की चाणक्य नीति का परिणाम कहें तो कहना गलत न होगा.

Big Breaking : 3 राज्यों में मोदी-शाह की चाणक्य नीति के आगे कांग्रेस-लेफ्ट के गढ़ ढह गये… March 3, 2018Leave a comment

3 राज्यों में मोदी-शाह की चाणक्य नीति के आगे कांग्रेस-लेफ्ट के गढ़ ढह गये… जी हाँ, जिस नॉर्थ ईस्ट के 7 राज्यों में मोदी लहर के बावजूद लोकसभा 2014 में मात्र एक सीट जीतने वाली बीजेपी ने कांग्रेस और लेफ्ट के इन 7 स्टेट्स को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. अगर इसे मोदी-शाह की चाणक्य नीति का परिणाम कहें तो कहना गलत न होगा.

खबर अनुसार पूर्वोत्तर के तीन राज्य त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में चुनावी तस्वीर साफ होती दिख रही है. त्रिपुरा में बीजेपी की आसान जीत देखने को मिल रही है. वहीं मेघालय में कांग्रेस भले ही सबसे आगे जाती दिख रही है मगर सरकार नहीं बना पाएगी. वहीं नगालैंड में बीजेपी की अगुवाई वाला गठबंधन बढ़त बनाता नजर आ रहा है. इन दोनों की असल तस्वीर दोपहर के बाद साफ हो जाएगी.

आपको जानकर हैरानी होगी कि त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में इस बार बीजेपी ने अभूतपूर्व तैयारी से चुनाव लड़ा है और यहां पर उसका आधार बहुत मजबूत नहीं था. असल में इन तीनों राज्यों में बीजेपी के हिस्से में 2 फीसदी वोट भी नहीं थे. बता दें की अब न सिर्फ एक्जिट पोल बल्कि रुझान में भी बीजेपी पहले से काफी मजबूत दिख रही है. बीजेपी ने गैर हिंदीभाषी क्षेत्र में कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा आक्रामक ढंग से चुनाव लड़ा, क्यूंकि उसे इन राज्यों में संगठन को भी शून्य से खड़ा करना था.

बता दें की इस बारे में सियासी जानकारों का कहना है कि 19 राज्यों की सत्ता पर काबिज बीजेपी नॉर्थ ईस्ट को जीतकर ऐसा रिकॉर्ड कायम करना चाहती है कि मिथक टूट जाए. वहीं अगर पुराने रिकॉर्ड को देखें तो यहां बीजेपी लेफ्ट और कांग्रेस के मुकाबले काफी कमजोर रही है. वहीं बात करें त्रिपुरा की तो यहां लेफ्ट लगातार 25 साल से कायम है. साथ ही लेफ्ट की सरकार सिर्फ केरल में बची है. बता दें की यहां माणिक सरकार की अगुवाई वाली वामपंथी सरकार दो दशक से सत्ता पर काबिज है. जबकि बीजेपी का एक भी विधायक नहीं था.

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