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पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी की कुंडली, इसमें छिपे है भविष्य में होने वाले फैसलों के रहस्य

पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी की कुंडली, इसमें छिपे है भविष्य में होने वाले फैसलों के रहस्य January 1, 2018Leave a comment

पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी की कुंडली, इसमें छिपे है भविष्य में होने वाले फैसलों के रहस्य :- पिछले कुछ समय के भीतर ही देश और दुनियां में एक नाम बहुत तेजी से उठ आर मजबूती से सबके सामने आ खड़ा हुआ है और वो नाम है नरेंद्र दामोदरदास मोदी. ये नाम नही अगर सही शब्दों में कहा जाये तो अपने विरोधियों के लिए कहर कहर है कहर.

इतना ही समझ लीजिये जब से सामने ए है तब से देश में कई दशक राज करने वाली कांग्रेस आज कही भी अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है. मोदी के फैसलों से देश दुनिया के कई मह्राठी हैरान है. लेकिन क्या अप को उनकी कुंडली के बारे में पता है. आइये हम आप को बताए है.

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को हुआ. जन्म का समय ११ बजे, मेहसाणा-गुजरात, जिसके अनुसार उनका जन्म लग्न वृश्चिक है और जन्म कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को विष्कुम्भ योग में हुआ है. प्राप्त जानकारी के अनुसार मोदी के जन्म की तारीख सितम्बर १७, १९४९ है और समय १०.५० मिनट है, अर्थात सबकुछ सही है परन्तु वर्ष एक वर्ष पूर्व है, इस समय के अनुसार जो लग्न है वह तुला है और उसका चार्ट है.

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आइये अब देखिये विश्लेषण :

१. लग्न तुला है और तुला में ही शुक्र बैठा है – यह अपने आपमें जबरदस्त रोजयोग कारक है और व्यक्ति को कीचड में पैदा होने के बावजूद राजसिंहासन तक पहुँचाने की क्षमता रखता है और शायद यह बात जो भी ज्योतिष जानते हैं उन्हें बताने की आवश्यकता नहीं कि लग्न में तुला के शुक्र का क्या मतलब होता है.

२. दशम भाव में नीच का मंगल – जिसके कारण पिता के सुख में कमी परन्तु उच्च दृष्टि माँ के स्थान पर अतः माँ की आयु लम्बी और भरपूर आशीर्वाद, साथ ही शत्रुओं को परास्त करने की अद्भुत क्षमता.

३. पराक्रम भाव अर्थात तृतीय भाव में अपनी ही राशि पर बैठा वक्री गुरु – यह भाई – बहनों के सुख को कमजोर करता है परन्तु अदभुत पराक्रम देता है, मोदी के बारे में ये दोनों ही बाते सर्वविदित हैं.

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४. राज्येश चन्द्रमा का भाग्य स्थान अर्थात नवम भाव में बैठना – यह एक अद्भुत राजयोग है. साथ ही गुरु और चन्द्रमा का दृष्टि योग जबरदस्त पराक्रम, राज क्षमता, सृजनात्मक विचार इन सबसे व्यक्ति को ओतप्रोत बनता है, और ये सभी गन मोदी में विद्यमान हैं.

५. एकादश भाव में शनि – यहाँ बैठकर शनि लग्न, पंचम, और अष्टम भाव को सीधे देख रहे हैं, अतः देर से विद्या की प्राप्ति, लग्न पर उच्च दृष्टि के कारण निरोगी एवं आध्यात्मिक विचारधारा, दुखी लोगो के प्रति सेवा का भाव ये सभी गुण प्रदान कर रहा है, साथ ही जीवन में अत्यधिक यात्रा और यात्रा के और सेवा के द्वारा लाभ को दर्शाता है, और इन सभी बातों को मोदी के सन्दर्भ में बताने की आवश्यकता नहीं.

६. छठवें भाव में राहु – कम से कम किसी ज्योतिष के विद्वान को इसका अर्थ बताने की आवश्यकता नहीं, शत्रुओं पर जबरदस्त प्रभाव, जिसने भी शत्रुता की वो गया.

७. द्वादश भाव में केतु, सूर्य, और बुध – जो स्वयं कन्या यानी कि बुध की अपनी राशि में हैं एक साथ युति कर रहे हैं. ऐसा किसी भी व्यक्ति को जबरदस्त योजनाकार, भ्रमणशील, प्रखर वक्ता, धर्म रक्षक, तथा परोपकारी बनाता है. साथ ही यह योग पुनः किसी भी शत्रु के लिए अत्यंत घातक है. सूर्य शुन्य अंश का और पिता का कारक और ग्रहण योग में होने के कारण पिता के सुख में कमी और पैतृक सम्पत्ति तथा पैतृक स्थान के सुख में भारी कमी को दर्शाता है.

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अब करते हैं दशाओं की बात :

मोदी का जन्म इस वर्ष के अनुसार गुरु की महादशा में हुआ, तुला लग्न में गुरु तीसरे और छठे भाव का स्वामी है , मोदी को जन्म से कितना दुःख झेलना पड़ा यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है.

1965 से – 1984 तक: यह शनि की दशा का समय था, शनि तुला लग्न में योगकारक तो हैं परन्तु राजयोगकारक नहीं. साथ ही सुख भाव(चतुर्थ ) से छठे भाव में बैठे हैं, अतः अत्यंत दुःख, खूब भ्रमण, आध्यात्मिक और नैतिक ज्ञान के साथ जीवन जीने को बाध्य किये, इस दौरान जैसा शनि का गुण है मोदी साधु संतों की सेवा में रहे और लगभग सन्यासी का जीवन यापन किये.

1984 से जुलाई 2001 तक: यह समय जहाँ से मोदी के राजनैतिक जीवन और अच्छे दिन की शुरुवात होती है, बुध इनकी कुंडली में भाग्येश है और अपनी उच्च राशि कन्या में द्वादश में बैठकर राजयोग भी बना रहा है और यही से मोदी के राजयोग की शरुवात हो जाती है.

30 जुलाई 2001 से 30 जुलाई – 2008 तक: केतु की महादशा का प्रारम्भ और मोदी राजयोग शुरू, केतु की महादशा शुरू होने के तुरंत बाद अक्टूबर में मोदी को मुख्यमंत्री की कुर्सी, २००२ में चुनाव और पुनः विजय जब केतु में शुक्र का अंतर आया.

30 जुलाई 2008 से शुक्र की महादशा प्रारम्भ: पुनः मुख्यमंत्री और मजबूती के साथ, दिसंबर २०१२ से शुक्र में राज्येश चन्द्रमा की अंतर दशा जो अभी जुलाई रहेगी , बताने की आवश्यकता नहीं की २०१३ से लेकर अभी तक मोदी कहा पहुंच चुके हैं, क्योंकि मेरे हिसाब से अभी लग्नेश शुक्र और राज्येश चन्द्रमा का समय चल रहा है.

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विशेष :

१. वर्तमान में भी तुला पर ही शनि हैं जो उच्च के हैं और जबरदस्त राजयोग बना हैं, मीन में उच्च के शुक्र भी है.

२. मेरे दिए हुए जन्म तारीख अर्थात सितम्बर 17,1949, सुबह 10.50 के अनुसार मोदी का जन्म दिन शनिवार, वरियन योग, कृष्ण पक्ष दशमी तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र है, दशमी तिथि जाया तिथि होती है और इन सारे योग में पैदा हुआ व्यक्ति राजा नहीं बनेगा तो कौन बनेगा?

३. सबसे ध्यान देने योग्य बात ये है कि मोदी ने गुजरात और वाराणसी दो जगह से अपना नामांकन दसमी तिथि को ही किया था। १७ और २६ दोनों का हे योग ८ है जो शनि का अंक है, मोदी १७ को शनिवार के दिन ही पैदा हुए हैं.

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