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यह शिवलिंग मरे हुए व्यक्ति को भी कर देता है जीवित!

यह शिवलिंग मरे हुए व्यक्ति को भी कर देता है जीवित! November 5, 2017Leave a comment

भारत न्यूज़ नई दिल्ली : मौत एक कड़वा सच है जो झूठ कभी नही हो सकता अगर कहे तो मरे लोग भी  जीवित हो सकते है तो आप मेरे बातो को मज़ाक समझेंगे मगर आज एक ऐसे शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे जहाँ मरे हुए लोग जीवित हो सकते है चलिए विस्तार से जानते है क्या है पूरा मामला।

चलिए आज हम आपको एक ऐसे ही शिवलिंग से हु बहु करा रहे है जहां जाने पर मरा हुआ व्यक्ति भी जीवित हो जाता है दरसल प्रकृति की वादियों में बसा यह उत्तराखंड के गांव देहरादून से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाखामंडल नामक स्थान जो कि यमुना जी नदी की तट पर बर्नीगाड़ नामक जगह से सिर्फ 4-5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है चलिए जानते है शिवलिंग के बारे में। आपको बता दे कि समुद्र तल से इस स्थान की ऊंचाई लगभग लगभग 1372 मीटर है।  दरशल दिल को लुभाने वाली यह नामी जगह गुफाओं और भगवान भोलेनाथ के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से काफी घिरा हुआ है। दरसल आपको बता दे कि यहां पर खुदाई करते वक्त विभिन्न आकार के और विभिन्न ऐतिहासिक काल के हजारों शिवलिंग मिले हैं और मिलते रहते है।

आपको बता दे कि इसके विषय में ये माना जाता है कि महाभारत युद्ध काल में पांचों पांडवों को जीवित आग में भस्म यानी जलाने  के लिए उनके चचेरे भाई कौरवों ने यहीं एक लाक्षागृह का निर्माण करवाया था और आपको बता दे कि ऐसी मान्यता भी है कि अज्ञातवास के दौरान इस शिव स्थान पर स्वयं युधिष्ठिर ने बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग को स्थापित किया था आप भी इस शिवलिंग का नाम सुने होंगे मगर आपको सायद याद न हो दरशल इस शिवलिंग को आज भी महामंडेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाता है ये जहां युधिष्ठिर ने शिवलिंग को स्थापित किया था आपको बता दे कि वहां एक बहुत ही खूबसूरत मंदिर भी बनाया गया था दरशल आपको बता दे कि शिवलिंग के ठीक ही सामने दो द्वारपाल पश्चिम की तरफ मुंह करके तैनात हुए नजर आते हैं।

आपको जानकर काफी आश्चर्य होगा कि ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में अगर किसी शव यानी किसी मरे हुए व्यक्ति को इन 2 द्वारपालों के सामने रखकर अगर उस मंदिर के पुजारी उस सव पर कोई पवित्र जल छिडक़ें तो वह मरा हुआ व्यक्ति ज्यादा देर के लिए तो नही मगर कुछ समय के लिए पुन: जीवित हो जाता है आपको बता दे कि वो इंसान ज्यादा देर के लिए नही बस जीवित होने के बाद वह भगवान का नाम लेता है और उस व्यक्ति को गंगाजल प्रदान किया जाता है आपको बता दे कि गंगाजल तुरन्त ग्रहण करते ही उस व्यक्ति कि आत्मा फिर से उस शरीर को त्यागकर चली जाती है। आपको बता दे कि लेकिन इस बड़ी बात का रहस्य क्या है यह आज तक भी कोई व्यक्ति और कोई व्यगनिक नहीं जान पाया। इस भोलेनाथ के मंदिर के पीछे दो द्वारपाल स्थित हैं, जिनमें से एक का हाथ क्यों कटा हुआ है अब ऐसा क्यों हैं यह बात आजतक एक बड़ा रहस्य ही बना हुआ है अब इसका रहस्य कब खत्म होगा हम कह नही सकते।

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