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अगर आप भी सोयाबिन खाते है तो अभी से ही बंद कर दे क्योकि ..

अगर आप भी सोयाबिन खाते है तो अभी से ही बंद कर दे क्योकि .. January 7, 2018Leave a comment

अगर आप भी सोयाबिन खाते है तो अभी से ही बंद कर दे :- हमारे देश में सोयाबीन बहुत पुराने समय से ही खाया जाता है लगभग ४०-५० वर्षो पहले हमारे देश में भी कोई व्यक्ति सोयाबीन नहीं खता था। तो हम आपको बताते है कि भारत में सोयाबीन की खेती कैसे शुरू हो गई इस जानकारी को बताने के लिए हम सबसे पहले आपको मनमोहन सिंह द्वारा कहे गए एक समझौते के बारे में जानना पड़ेगा।

आपको हम बता दे कि मित्रो १९९१ के दौर में Globalization के नाम पर हमारे देश में ऐसे ऐसे समझौते हुए है। जिन्हें जानकार आप चौक जायेगे। उस समझौते के आधार पर हालैंड और वहां के सुअरों का गोबर(टट्टी)और वह भी एक करोड़ टन भारत लाया जाएगा। और फिर उसे डंप किया जाएगा।

अगर आप भी सोयाबिन खाते है तो अभी से ही बंद कर दे
अगर आप भी सोयाबिन खाते है तो अभी से ही बंद कर दे

 

इस प्रकार का समझौता मनमोहन सिंह ने एक बार किया था। जब मनमोहन सिंह ने कहा गया यह समझौता क्यों किया तब मनमोहन सिंह ने कहा हालैंड के सुअरों का गोबर क्वालिटी में बहुत बढ़िया है। और पूछा गया कि क्वालिटी में कैसे बढ़िया है। तो मनमोहन सिंह ने बताया कि हालैंड के सूअर सोया बीन खाते है इसलिए बढ़िया है।

दोस्तों जिस प्रकार भारत में  लोग गाय को पालते है ऐसे ही हालेंड के लोग सूअर पालते है वहां बड़े बड़े रेंच होते है सुअरों कि लिए । लेकिन वहाँ सूअर मांस के लिए पाला जाता है । सूअर जितना सोयाबीन खाएगा उतना मोटा होगा ,और उतना मांस उसमे से निकलेगा । तो फिर मनमोहन सिंह से पूछा गया की ये हालेंड जैसे देशो मे सोयाबीन जाता कहाँ से है। तो पता चला भारत से ही जाता है । और मध्यपरदेश मे से सबसे ज्यादा जाता है । दोस्तों  पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कहते है अगर किसी खेत में आपने 10 साल सोयाबीन उगाया तो 11 वे साल आप वहां कुछ नहीं उगा सकते । जमीन इतनी बंजर हो जाती है । अब दिखिए इस मनमोहन सिंह ने क्या किया । होललैंड के सुअरों को सोयाबीन खिलाने के लिए पहले मध्यप्रदेश में सोयाबीन कि खेती करवाई ।

अगर आप भी सोयाबिन खाते है तो अभी से ही बंद कर दे
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आपको हम बता दे कि किसानो को बोला गया आपको सोयाबीन की फसल का दाम का ज्यादा दिया जाएगा। तो किसान बेचारा लालच के चक्कर मे सोयाबीन उगाना शुरू कर दिया। और कुछ डाक्टरों ने रिश्वत लेकर बोलना शुरू कर दिया की ये सेहत के लिए बहुत अच्छी है आदि आदि ।

तो इस प्रकार भारत से सोयाबीन होलेंड जाने लगी । ताकि उनके सूअर खाये उनकी चर्बी बढ़े और मांस का उत्पादन ज्यादा हो । और बाद मे होललैंड के सूअर सोयाबीन खाकर जो गोबर (टट्टी) करेगे वो भारत में लाई जाएगी । वो भी एक करोड़ टन सुअरों का गोबर(टट्टी ) ऐसा समझोता मनमोहन सिंह ने लिया । और ये समझोता एक ऐसा आदमी करता है जिसको इस देश में Best Finance Minster का आवार्ड दिया जाता है । और लोग उसे बहुत भारी अर्थशास्त्री मानते है । । शायद मनमोहन सिंह के दिमाग में भी यही गोबर होगा । इसी कारन से भारत में सोयाबीन की पैदावार बहुत अधिक मात्र में करवाई जाती है। असल सोयाबीन मे जो प्रोटीन है वो एक अलग किस्म का प्रोटीन है उस प्रोटीन को शरीर का एसक्रिटा system बाहर नहीं निकाल पाता और वो प्रोटीन अंदर इकठ्ठा होता जाता है । जो की बाद मे आगे जाकर बहुत परेशान करता है । और शरीर के लिए बहुत ही हानिकारक होता है।

अगर आप भी सोयाबिन खाते है तो अभी से ही बंद कर दे
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प्रोटीन के और भी विकल्प हमारे पास है । जैसे उरद की दाल मे बहुत प्रोटीन है आप वो खा सकते है । इसके अतिरिक्त और अन्य दालें है । । मूँगफली है,काला चना है आदि आदि । और अंत मे एक और बात मित्रो आपके घर मे अगर दादी या नानी हो तो आप उन्हे पूछे की क्या उनकी माता जी ने उनको कभी सोयाबीन बनाकर खिलाया था ?? आपको सच सामने आ जाएगा ।


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